-टी.बी. खिलाफ जन आंदोलन से बदलेगी तस्वीर: जिला प्रशिक्षण अधिकारी हरमेश चन्द
PANIPAT AAJKAL , 24 मार्च। उपायुक्त एंव प्रधान, जिला रैडक्रास सोसाईटी डॉ0 विरेन्द्र कुमार दहिया के कुशल मार्गदर्शन व हरियाणा रैडक्रास के उपाध्यक्ष अंकुश मिगंलानी और महासचिव डा0 सुनील कुमार के निर्देशानुसार तथा जिला रैडक्रास सोसाईटी सचिव गौरव राम करण की अगुवाई में प्राथमिक सहायता का प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे लगभग 250 युवक-युवतियों क्षय विश्व टी.बी. दिवस, 2026 के उपलक्ष्य में टी.बी. व अन्य क्षय रोगों के बारे में जागरूक किया गया और अन्य लोगों को जागरूक करने बारे शपथ दिलवाई गई। इस अवसर पर प्रवक्तागण सोनिया शर्मा, कला भारद्वाज, सहित लाल चन्द, जसमेर सिंह, अमित कुमार कार्यालय के कर्मचारीगण व स्वंयसेवक मौजूद रहे।
रैडक्रास सचिव गौरव राम करण ने बताया कि रैडक्रास युवाओं/युवतिओं को प्रशिक्षण के साथ-2 समाज सेवा से जोडऩे हेतु जागरूक किया जाता है। युवा पीड़ी देश का भविष्य है। प्रत्येक युवा को समाज सेवा में आगे आना चाहिये ताकि अच्छे समाज का निर्माण हो सके। उन्होनें कहा कि टी.बी. मुक्त भारत अभियान को उच्च प्राथमिकता देना इस इस अभियान को जन-आदंोंलन का रूप देना सभी देशवासियों को कर्तव्य है। भारत सरकार ने 2030 तक टी.बी. उन्मूलन को लक्ष्य तय किया है, जिसे जन सहभागिता के साथ ही पूर्ण किया जा सकता है।
उन्होंने कहा कि रैडक्रास प्राथमिक सहायता प्रशिक्षण के साथ-साथ युवक-युवितयों को समाज सेवा से जोडऩे का कार्य करती है। उन्होनें युवाओं को स्वैच्छिक रक्तदान के प्रति भी जागरूक किया और बताया कि भारतीय रैडक्रास सोसाईटी, हरियाणा के उपाध्यक्ष अंकुश मिगलानी जी के 40वें जन्म दिवस के उपलक्ष्य में 25 मार्च, 2026 को रैडक्रास रक्त बैंक, रैडक्रास भवन, पानीपत के प्रांगण में एक स्वैच्छिक रक्तदान शिविर का आयोजन किया जायेगा, ताकि जरूरमंद मरीजों व्यक्तियों को रक्त मुहैया करवाया जा सके। उन्होनें युवाओं से अधिक से अधिक संख्या में रक्तदान करने की अपील की।
इसी कड़ी में मंगलवार जिला प्रशिक्षण अधिकारी हरमेश चन्द द्वारा जागरूक करते हुए उन्होनें कहा कि 24 मार्च, 1882 को रोबर्ट कोच ने टी.बी. की खोज की थी और इसी दिन को विश्व क्षय रोग दिवस के रूप में मनाया जाता है। टी.बी. एक संक्रमक रोग है, जोकि संक्रमित व्यक्ति के खांसने, छींकने या बोलने पर हवा में फैलने वाले सूक्षम कण स्वस्थ व्यक्ति के फेफड़ों में प्रवेश कर जाते है। यदि सही समय पर टी.बी. की जांच करवा ली जावे और तो उसका ईलाज संभव है। हमें स्वंय जागरूक होकर अन्य लोगों को टी.बी. के लक्षणों, कारणो ंव उपचार के बारे में जागरूकता फैलानी चाहिये। इस दौरान सभी प्रतिभागियों को टी.बी. जागरूकता व स्वैच्छिक रक्तदान बारे शपथ दिलवाई गई।