-आयकर प्रणाली की मूलभूत जानकारी प्रदान करना तथा टीडीएस की व्यावहारिक समझ विकसित करना हमारा उद्देश्य: आरती राजेश शर्मा
PANIPAT AAJKAL : 16 फरवरी, पानीपत. एसडी पीजी कॉलेज पानीपत में वाणिज्य विभाग के तत्वाधान में ‘टीडीएस एवं कर देयता’ विषय पर विस्तार व्याख्यान का आयोजन किया गया जिसका उद्देश्य विद्यार्थियों को आयकर प्रणाली की मूलभूत जानकारी प्रदान करना तथा टीडीएस की व्यावहारिक समझ विकसित करना रहा । कार्यक्रम के मुख्य वक्ता आरती राजेश शर्मा सीएमए ने अपने व्याख्यान में टीडीएस की अवधारणा, इसकी आवश्यकता, विभिन्न धाराओं के अंतर्गत कटौती की प्रक्रिया तथा कर-देयता की गणना के महत्वपूर्ण पहलुओं पर विस्तार से प्रकाश डाला । उन्होंने बताया की टीडीएस सरकार द्वारा कर संग्रहण की एक प्रभावी प्रणाली है, जिसके माध्यम से आय के स्रोत पर ही कर की कटौती सुनिश्चित की जाती है । उनके साथ बतौर चेयरपर्सन विधु मित्तल सीएमए करनाल ने शिरकत की और विद्यार्थियों का ज्ञानवर्धन किया । माननीय मेहमानों का स्वागत प्राकाह्री डॉ अनुपम अरोड़ा, वाणिज्य विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ राकेश गर्ग, डॉ दीपा वर्मा, डॉ दीपिका अरोड़ा, डॉ पवन कुमार, प्रो आशीष, प्रो मनोज कुमार, प्रो शिल्पा ठाकुर, प्रो पूजा गर्ग और प्रो पूजा ने किया । मंच सचालन और कार्यक्रम की सूत्रधार डॉ दीपिका अरोड़ा रही ।
आरती राजेश शर्मा सीएमए ने उदाहरणों के माध्यम से वेतन, बैंक ब्याज, ठेकेदारी भुगतान आदि पर टीडीएस कटौती की प्रक्रिया को सरल भाषा में समझाया । साथ ही उन्होनें आयकर रिटर्न भरते समय टीडीएस के समायोजन एवं रिफंड की प्रक्रिया की भी विस्तृत जानकारी दी । विद्यार्थियों ने भी उत्साहपूर्वक प्रश्न पूछे जिनका वक्ता ने शानदार उत्तर दिया । वक्ता ने टीडीएस और टीसीएस के बीच अंतर को भी सरल उदाहरणों द्वारा समझाया । उन्होंने बताया कि टीडीएस में कर-आय का भुगतान करने वाला व्यक्ति काटता है जबकि टीसीएस में विक्रेता वस्तु या सेवा की बिक्री के समय कर एकत्र करता है । इसके अतिरिक्त उन्होंने आय के पाँच प्रमुख शीर्षों, वेतन से आय, मकान संपत्ति से आय, व्यवसाय या पेशे से आय, पूंजीगत लाभ और अन्य स्रोतों से आय पर टीडीएस की लागू होने वाली परिस्थितियों को विस्तार से समझाया । उन्होंने व्यावहारिक उदाहरणों के माध्यम से बताया कि विभिन्न परिस्थितियों में टीडीएस की दरें एवं नियम कैसे लागू होते हैं । साथ ही आयकर रिटर्न भरते समय टीडीएस के समायोजन एवं रिफंड की प्रक्रिया की भी जानकारी दी ।
कार्यक्रम की अध्यक्षता प्राचार्य डॉ अनुपम अरोड़ा ने की । उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि इस प्रकार के व्याख्यान विद्यार्थियों को व्यवहारिक ज्ञान प्रदान करते हैं और उन्हें भविष्य में कर संबंधी दायित्वों के प्रति जागरूक बनाते हैं । टीडीएस एक डायरेक्ट टैक्सेशन (प्रत्यक्ष कर-निर्धारण) का तरीका है जिसकी शुरुआत इनकम सोर्स (आय के स्त्रोत) से या इनकम पेआउट (आय की अदायगी) के समय से ही टैक्स एकत्रित करने के लिए की गई है । टीडीएस का फुल फॉर्म ‘हैटैक्स डिडक्टेड एट सोर्स’ यानि स्त्रोत पर की गई टैक्स (कर) कटौती है । इस पद्धति के अंतर्गत, यदि कोई व्यक्ति (कटौती करनेवाला/ डिडक्टर) किसी अन्य व्यक्ति को भुगतान करने के लिए ज़िम्मेदार है तो वह सोर्स (स्त्रोत) पर टैक्स में डिडक्शन (कटौती) कर शेष रकम डिडक्टी को ट्रान्स्फर करेगा । काटी गई टीडीएस राशि केंद्रीय सरकार को भेज दी जाती है । फॉर्म 26 एएस या डिडक्टर (कटौती करनेवाले) द्वारा जारी किए गए टीडीएस सर्टिफिकेट (प्रमाणपत्र) में डिडक्टी टैक्स डिडक्टेड एट सोर्स (टीडीएस) राशि की कोई भी जाँच कर सकता है ।
चेयरपर्सन विधु मित्तल सीएमए करनाल ने कहा कि टीडीएस टैक्स चोरी पर नियंत्रण रखने में मदद करता है । इतना ही नहीं, इस पद्धति में टैक्स पेयर (करदाता) को वित्तीय वर्ष के अंत में वार्षिक कर के रुप में एक बड़ी राशि का भुगतान करने की आवश्यकता नहीं होती ।