-उद्यान विभाग की पहल से जिले में बढ़ेगा बागवानी का रकबा : उपायुक्त डॉ विरेंदर कुमार दहिया -फव्वारा सिस्टम अनिवार्य, निरीक्षण के बाद मिलेगी सब्सिडी -फरवरी–मार्च में बाग लगाने का सुनहरा अवसर
PANIPAT AAJKAL , 15 फरवरी। जिले में बागवानी को बढ़ावा देने के उद्देश्य से उद्यान विभाग ने एक अहम निर्णय लेते हुए बाग लगाने वाले किसानों को माइक्रो इरिगेशन (फव्वारा सिस्टम) के लिए मीकाडा पोर्टल से रजिस्ट्रेशन करवाने में अगले आदेशों तक छूट दे दी है। यह कदम किसानों की सुविधा और विभागीय लक्ष्यों की पूर्ति को ध्यान में रखते हुए उठाया गया है। उद्यान विभाग द्वारा बाग लगाने वाले किसानों को प्रति एकड़ 43 हजार रुपये का अनुदान दिया जा रहा है, जिसमें पहले वर्ष और दूसरे वर्ष अलग-अलग किश्तों में सहायता प्रदान की जाती है। यदि संबंधित भूमि पर पहले धान की फसल रही हो तो किसानों को अतिरिक्त प्रोत्साहन राशि भी दी जाती है। हालांकि, अब तक अनुदान प्राप्त करने के लिए माइक्रो इरिगेशन का मीकाडा पोर्टल पर पंजीकरण अनिवार्य था। पोर्टल पर तकनीकी कारणों से प्रभावित होने के चलते किसानों को थोड़ी समस्या थी इस ध्यान में रखते हुए विभाग ने अस्थायी छूट प्रदान की है। हालांकि, फव्वारा सिस्टम लगाना अनिवार्य रहेगा और उसका भौतिक निरीक्षण किया जाएगा। निरीक्षण रिपोर्ट के आधार पर ही अनुदान जारी किया जाएगा। उपायुक्त डॉ. विरेंद्र कुमार दहिया ने कहा कि प्रशासन किसानों की आय बढ़ाने और कृषि को अधिक लाभकारी बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। पारंपरिक फसलों के साथ-साथ बागवानी अपनाने से किसानों को स्थायी और बेहतर आमदनी मिल सकती है। “सरकार की योजनाओं का उद्देश्य किसानों को तकनीकी अड़चनों से राहत देकर उन्हें प्रोत्साहित करना है। मीकाडा रजिस्ट्रेशन में दी गई छूट से निश्चित रूप से जिले में बागवानी का विस्तार होगा। उपायुक्त डॉ दहिया ने बताया कि बागवानी के अनेक फायदे हैं। इससे भूमि की उत्पादकता बढ़ती है, पानी की बचत होती है और लंबे समय तक नियमित आय का स्रोत बनता है। फलदार पौधे पर्यावरण संरक्षण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, जिससे हरित आवरण बढ़ता है और मिट्टी की गुणवत्ता में सुधार होता है। उद्यान विभाग की यह पहल न केवल किसानों को राहत देने वाली है, बल्कि जिले में कृषि के स्वरूप को भी नई दिशा देने वाली साबित हो सकती है। जिला उद्यान अधिकारी डॉ. संदीप नागर ने बताया कि जिन किसानों को अब तक केवल रजिस्ट्रेशन अड़चन के कारण अनुदान नहीं मिल पा रहा था, वे अब इसका लाभ उठा सकेंगे। उन्होंने स्पष्ट किया कि फव्वारा सिस्टम लगाना अनिवार्य रहेगा और विभागीय टीम द्वारा स्थल निरीक्षण किया जाएगा। अधिक से अधिक किसान आधुनिक तकनीकों को अपनाकर बागवानी की ओर बढ़ें। फरवरी और मार्च का समय बाग लगाने के लिए अत्यंत उपयुक्त है, जबकि वर्षा ऋतु में जुलाई से सितंबर भी अनुकूल रहता है,” उन्होंने कहा। वर्तमान में जिले में लगभग 250 एकड़ क्षेत्र में ही बाग लगे हुए हैं, जबकि कई किसानों ने आवेदन कर रखा है। रजिस्ट्रेशन की बाधा दूर होने से अब इस क्षेत्रफल में तेजी से वृद्धि की उम्मीद है।